मप्र हिंदी साहित्य सम्मेलन भोपाल ने.. बॉलीवुड गीतकार एवं कवि इरशाद कामिल को.. जेएल वर्मा स्मृति साहित्य सम्मान से नवाजा..

इरशाद कामिल को मिला जे एल वर्मा सम्मान..

भोपाल । मप्र हिंदी साहित्य सम्मेलन भोपाल द्वारा बुंदेलखंड के प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी, विधिवेत्ता एवं साहित्यकार स्व. जे. एल. वर्मा स्मृति साहित्य सम्मान मशहूर बॉलीवुड गीतकार एवं कवि इरशाद कामिल जी को उनकी साहित्य साधना हेतु दिया गया। जब वी मेट, तमाशा, सुल्तान, रॉकस्टार जैसी अनेक हिट फिल्मों के गीतों के रचेता एवं फ़िल्मफ़ेअर अवार्ड विजेता इरशाद कामिल आज हिंदी फिल्मों के शीर्षस्थ गीतकार हैं । राज्य संग्रहालय में आयोजित एक कार्यक्रम में पलाश सुरजन, संतोष चौबे और स्व दुष्यंत कुमार के पुत्र आलोक त्यागी ने एक भव्य समारोह में यह अलंकरण इरशाद कामिल को प्रदान किया ।

वरिष्ठ पत्रकार आरिफ मिर्ज़ा ने इस अवसर पर बताया कि महात्मा गांधी जब बुंदेलखंड यात्रा पर आए तब श्री वर्मा उनकी दमोह यात्रा के संयोजक थे, उस दिन पहली बार दमोह में लाउड स्पीकर का प्रयोग हुआ था जब वर्मा जी ने महात्मा गांधी का स्वागत मान पत्र पढ़ा तो सारा शहर तालियों से गूंज उठा। सम्पूर्ण भारत मे प्रथम बार दमोह में सामाजिक चेतना से शराब बंदी दमोह में हुई थी इसको जानकर गांधी जी ने बहुत बधाई दी थीसंयोग की बात है कि इस वर्ष गांधी जी की 150 वीं वर्षगांठ भी है। इन सब प्रसंगों का ज़िक्र पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल द्वारा संपादित मप्र शासन की पुस्तक मप्र में गाँधी में भी किया गया है। पुरानी सीपी एवं बरार विधानसभा के सदस्य रहे वर्मा जी ने सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक स्व. हरीसिंह गौर के साथ काम किया और विश्वविद्यालय कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष पद पर अनेक वर्षों तक आसीन रहे।

दमोह महाविद्यालय एवं दमोह विधि महाविद्यालय की स्थापना की। उनकी स्मृति को अक्षुण्ण बनाने के लिए ही विधि महाविद्यालय का नाम जे.एल. वर्मा विधि महा विद्यालय किया गया है। अनुराग तिवारी ने मानपत्र वाचन करते हुए कहा कि स्व. वर्मा जी की स्मृति को अक्षुण्य रखने हेतु आज यह सम्मान श्री इरशाद कामिल को दिया जा रहा है जिनके शब्द इस जगत के धुंधलके में प्रकाश की किरण जैसे जिंदगियां रोशन कर रहे हैं। इस अवसर पर इरशाद कामिल ने अपनी रचनाओं का पाठ किया साथ ही सूरत से शाहजहाँ शायद, दिल्ली से संदीप शजर, मुम्बई से संतोष सिंह और भोपाल से नुसरत मेहदी, तथा ममता तिवारी ने अपनी रचनाएं सुनाईं । बद्र वास्ती ने संचालन किया एवं शरबानी ने आभार व्यक्त किया। 

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