कुंडलपुर में पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव

दमोह। कुण्डलपुर में चातुमास कर रहे निर्यापक श्रेष्ठ मुनि श्री समय सागर जी महाराज के ससंघ मंगल सानिध्य में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव अति उत्साह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर पारसनाथ भगवान की दोनों ही खडगा सन प्रतिमाओं का मस्तकाभिषेक किया गया।

शांतिधारा एवं अभिषेक करने वालों में श्री दिनेश कुमार गंगवाल जयपुर, पवन कुमार टोंगिया हाटपिपलिया के अलावा दमोह के आनंद जैन बीएसएनएल, डॉ पीके जैन, नरेंद्र बजाज पत्रकार, डॉ राजीव चैधरी एवं प्रदीप जैन जबलपुर आदि मुख्य रहे। पूजन विधान के पश्चात भगवान की आरती की गई एवं छात्र समर्पित किए गए इसके पश्चात भगवान के निर्माण महोत्सव पर लाडू समर्पित किए गए।

इस अवसर पर मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन ओं में कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जो मानव समता के साथ सहन करता है और अपने कर्मों की निर्जरा कर लेता है वह पारसनाथ भगवान की तरह मोक्ष का अधिकारी बन जाता है। पारसनाथ भगवान ने कमट के द्वारा किए गए उपसर्गों का प्रतिकार नहीं किया समता से सहन करते रहे फलस्वरुप में केवलज्ञान को प्राप्त हो गए। क्रोध की अग्नि भयंकर होती है इसे क्षमा के जल से ही शांत किया जा सकता है बदला लेने की भावना युगो-युगो तक मनुष्य को संसार में भटकाती रहती है। क्षमा वीरों का आभूषण होता है कमट का जीव 10 भव तक पारसनाथ भगवान से बदला लेता रहा और भयंकर उपसर्ग करता रहा किंतु इन उपसर्गों में भी वे स्थिर बने रहे और उन्होंने मोक्ष को पा लिया।