प्रहलाद की मौजूदगी में प्रभात को क्यों आना पड़ा-

दमोह। बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक रामकृष्ण कुसमरिया अब दमोह तथा पथरिया से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में है। उनके नामांकन पत्र को वापस कराने के लिए बुधवार दोपहर 3 बजे के पहले तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। इस दौरान कुछ ऐसे सवाल भी उभरकर सामने आए हैं जिनका जवाब नहीं मिल सका है।

दमोह में विधानसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह से ओझल रहे सांसद प्रहलाद पटेल अचानक नाम वापसी प्रक्रिया के दिन उभर कर सामने आए। उन्होंने तहसील कार्यालय पहुंचकर नरेंद्र दुबे और शिवचरण पटेल के नामांकन पत्र वापस कराए। सांसद के खास समर्थक मित्रों में गिने जाने वाले साहित्यकार नरेंद्र दुबे ने दमोह से निर्दलीय नामांकन पत्र भरा था।

  

मंत्री जयन्त मलैया भी इनको मनाने उनके आवास पर गए थे। तथा घंटे भर से अधिक तक मुलाकात का दौर चला था। इधर जिला पंचायत के अध्यक्ष और पथरिया से निर्दलीय नामांकन भरने वाले और अपने साथ रामकृष्ण कुसमरिया बाबा जी का भी दमोह पथरिया से नामांकन भरवाने वाले शिवचरण पटेल का नामांकन भी सांसद पटेल की मौजूदगी में निकाला गया।  इसके बाद सांसद ने मीडिया से चर्चा के दौरान दोनों नामांकन वापस लेने वालों को साधुवाद भी दिया।

यहा सवाल यही उठता है कि इन दो नामांकन की तरह सांसद श्री पटेल नेे पूर्व सांसद रामकृष्ण कुसमरिया का नामांकन वापस कराने में किसी प्रकार की कोई पहल करते हुए रुचि क्यों नहीं ली ? जबकि वह चाहते तो बाबा जी से बात करके कुछ रास्ता निकाल सकते थे। बाबा जी को मनाने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा दोबारा दमोह आये तब भी उनके साथ सांसद पटेल ने बाबा जी से मुलाकात करने या चर्चा की पहल क्यों नहीं की।

क्या श्री पटेल को प्रभात जी के दमोह आने की सूचना पार्टी संगठन ने नही दी थी? या पार्टी के नेता इस मामले में पटेल को जानबूझकर दूर रखना चाहते थे। बता दे कि श्री झा जब हेलीकॉप्टर से दमोह आए उस समय मंत्री जयंत मलैया से लेकर विधायक लखन पटेल तक हेलीपैड पर पहुंचे। पार्टी जिला अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी भी थे। परंतु सांसद प्रहलाद पटेल नहीं पहुंचे ? क्या सांसद पटेल नही चाहते थे कि बाबा जी को मनाया जाए, या फिर बाबा जी के अपनी लोकसभा सीट को वापिस मांग लेने की आशंका थी।

बाबा जी के मामले में प्रभात झा से कहां चूक हुई ? 

एक और सवाल खड़ा होता है.. बाबा जी से श्री झा की चर्चा हो गई थी तो अचानक बाबा को किसने भड़का दिया तथा श्री झा से मिले बिना ही बाबा अपने बंगले से गायब हो गए। और हेलीकॉप्टर से आ  श्री झा को  2 घंटे तक बाबाजी का इंतजार करना पड़ा, फिर भी बाबा जी वापस नहीं लौटे। आखिर इस मामले में झा से कहां चूक हुई ? असल मे बाबा जी और झा के बीच की कड़ी एक स्वामी जी बने हुए थे। वही पार्टी संगठन से बाबा जी खपा थे। ऐसे में बाबाजी की मंशा को समझने में झा चूक गए और हेलीकॉप्टर से आकर बैरंग लौटे।

पूर्व मंत्री गंगाराम बाबाजी को क्यों साथ मे ले गए !

बाबाजी को अपने साथ ले जाने वाला शख्स कौन था जिसने बाबा के बेदाग राजनीतिक जीवन में बगावत का तमगा लगवा दिया ? दरअसल बाबाजी श्री झा से मोबाइल पर जब चर्चा कर रहे थे उस दौरान उनके बंगले पर पूर्व मंत्री गंगाराम पटेल और पूर्व महामंत्री किशोर अग्रवाल मौजूद थे। बाद में बाबा जी इन्ही के साथ चलते बने। और झा के जाने के बाद जटाशंकर छतरपुर से वापस दमोह पहुंचे। उधर श्री झा पत्रकारों के सामने यही कहते रहे कि पता नहीं किसने बाबा जी को गायब कर दिया। दरअसल पार्टी में अपनी उपेक्षा से पूर्व मंत्री गंगाराम और पूर्व महामंत्री किशोर अग्रवाल भी बेहद खफा थे। शायद इसीलिए उन्होंने बाबा जी को भी हमराह कर लिया।

जबेरा से प्रदेश मंत्री को मनाने में क्यों रुचि नहीं ली?

बाबा जी को मनाने के लिए लगातार प्रयास करने वाले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री झा ने जबेरा से बगावत करके निर्दलीय नामांकन भरने वाले प्रदेश मंत्री ऋषि लोधी के मामले में कोई रुचि क्यों नहीं ली ? उन्हें मनाने का प्रयास क्यों नहीं किया गया ? इसका जवाब भी लोग तलाश रहे हैं। यहां यह भी कहा जा रहा है कि ऋषि की टिकट कटवाने में सांसद का हाथ था और ऋषि ने दिवाली के दिन सांसद पर खुलकर निशाना साधा था। इसलिए कोई भी सांसद की नाराजगी के डर से ऋषि को मनाने के पचड़े में नहीं पड़ना चाहता था।

संसदीय क्षेत्र में सांसद समर्थक को 4 कांग्रेस टिकट-

उधर दमोह संसदीय क्षेत्र के कांग्रेश टिकटों की बात की जाए तो श्री पटेल के खास समर्थक राहुल सिंह को दमोह, प्रदुमन सिंह को मलहरा, तरवर सिंह को बंडा और कमलेश साहू को गढ़ाकोटा-रहली से कांग्रेस ने टिकट दी है। जबकि भाजपा ने सिर्फ जबेरा क्षेत्र से सांसद समर्थक धर्मेंद्र सिंह को पार्टी प्रत्याशी बनाया है। जिसे  देख कर राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी होने लगी है कि भाजपा से ज्यादा तो सांसद श्री पटेल की कांग्रेश में चल रही है।

कुल मिलाकर अब हालात को देखकर कहा जा सकता है कि बीजेपी में अंदर ही अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सांसद और मंत्री विधायकों के बीच में आमने सामने भले ही सब कुछ सामान्य नजर आता हो, लेकिन पीठ पीछे कुछ ना कुछ गड़बड़ है। जिसका खामियाजा बाबा जी और ऋषि की बगावत के तौर पर तो सामने आ ही चुका है। देखना होगा भाजपा मैं अंदरूनी वर्चस्व की लड़ाई आने वाले दिनों में क्या गुल खिलाती है। अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट