जबरदस्त मैनेजमेंट फिर भी.. सीएम शिवराज का रोड शो कमलनाथ के मुकाबले प्रभाव नहीं छोड़ सका..

मुख्यमंत्री के रोड शो में भाजपा ने लगाया पूरा जोर-

दमोह। जनादेश यात्रा लेकर मप्र के वित्त मंत्री जयंत मलैया के निर्वाचन क्षेत्र दमोह पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रोड शो और आमसभा के लिए तगड़े मैनेजमेंट के साथ भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी। परंतु सीएम की सभा और रोड शो के दौरान वह जुनून और जोश देखने को नहीं मिला जो 2 महीने पहले इसी तहसील ग्राउंड पर कमलनाथ की सभा और यहांं से शुरू हुए उनके रोड शो के दौरान देखने मिला था।

विधानसभा चुनाव के पहले और अक्टूबर के अंतिम दिन दमोह पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का हेलीकॉप्टर होमगार्ड ग्राउंड पर उतरते ही भाजपा नेताओं, पदाधिकारियों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत बंदन अभिनंदन किया। इसके बाद जन आशीर्वाद  रथ में मुख्यमंत्री श्री चौहान के साथ वित्त मंत्री  जयंत मलैया, उनकी धर्मपत्नी सुधा मलैया, सांसद प्रहलाद पटेल आदि सवार हुए और यही से ही रोड शो शुरू हो गया।

मुख्यमंत्री के रोड शो में सबसे आगे श्याम बैंड उसके पीछे दो पहिया वाहनों और खुली जीप में सवार मातृशक्ति, इसके पीछे बैटरी चलित गाड़ी में सवार विकलांग और फिर हाथों में भाजपा का झंडा थामे उत्साही कार्यकर्ताओं की भीड़ तथा इसके पीछे पुनः बैंड पार्टी तथा आशीर्वाद यात्रा रथ में खड़े मुख्य मंत्री, वित्त मंत्री और सांसद जनता का अभिवादन करते चल रहे थे

तगड़ी पुलिस व्यवस्था के बीच मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा का काफिला यानि रोड शो किल्लाई नाका, तीन गुल्ली, स्टेशन चौराहा, राय चौराहा घंटाघर, टॉकीज तिराहा, कीर्ति स्तंभ होते हुए आम सभा स्थल तहसील ग्राउंड पहुंचा। इस दौरान रास्ते में जगह जगह सजाए गए स्वागत प्वाइंटों पर विभिन्न सामाज संगठनों के बैनर तले मुख्यमंत्री का अभिनंदन स्वागत किया गया।

तहसील ग्राउंड सभा स्थल पर दीप प्रज्वलन के दौरान भाजपा के अनेक वरिष्ठ नेताओं कि मंच पर मौजूदगी रही। इस दौरान पूर्व कृषि मंत्री बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया सहित जिले के 3 अन्य विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा टिकट के दावेदार नेताओं के चेहरों पर उपेक्षा की बजह से उत्साह की जगह आशंका के भाव झलकते नजर आए।

हटा, पथरिया और जबेरा से भाजपा प्रत्याशी के नाम को लेकर जो चर्चा चल रही है उससे वर्तमान विधायक भी संशय में हैं। जिससे हटा विधायक  उमा देवी खटीक, पथरिया विधायक लखन पटेल के अलावा पूर्व मंत्री व जबेरा के पूर्व विधायक दशरथ सिंह भी टिकट को लेकर चिंता में है।

वहीं इसकेे पूर्व जबेरा से विधायक रहे चंद्रभान सिंह और भाजपा प्रदेश मंत्री ऋषि लोधी के अलावा पथरिया से विधायक रहे रामकृष्ण कुसमरिया व राजेन्द्र गुरु की तगड़ी दावेदारी तथा हटा से दमोह जनपद अध्यक्ष आलोक अहिरवार की दावेदारी व रामकली तंतुबाय के विरोध का असर सीएम की सभा में देखने को मिला।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने 15 साल में मध्य प्रदेश को बीमारू राज्य से समृद्ध राज्य की श्रेणी में पहुंचाने के लिए किए गए प्रयासों की चर्चा करते हुए आम जनता से एक बार फिर आशीर्वाद देने की अपील की। वित्त मंत्री जयंत मलैया ने भी 15 साल के मंत्री कार्यकाल में दमोह के विकास के लिए किए कार्यों की सूचीबद्ध जानकारी दी। सांसद प्रहलाद पटेल ने भी केंद्र  और प्रदेश सरकार के जन हितेषी कार्यों की चर्चा की।

विशाल मंच पर भाजपा के नए पुराने नेताओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी के बावजूद कुछ पुराने पदाधिकारियों की अनुपस्थिति वर्तमान संगठन द्वारा उनकी उपेक्षा व नाराजगी का संकेत देती नजर आई। इधर मुख्यमंत्री के भाषण में पूर्व की तरह जोश और उत्साह की जगह भांजे भांजियों द्वारा आई लव यू कहने और इसके जवाब में उनके द्वारा सेम टू यू कहने जैसी बातों का समावेश नजर आया।

कुल मिलाकर विधानसभा चुनाव के पहले मुख्य मंत्री श्री चौहान की आम सभा और रोड शो के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ आम जनता में वह जोश और जुनून देखने को नही मिला जो पूर्व में नजर आता था। जबकि 2 माह पूर्व कांग्रेस नेता कमलनाथ की सभा और रोड शो ने जो शमा बंधा था उसकी चर्चा आज भी कांग्रेसी करने से नहीं चूकते हैं।

सत्ता, संगठन और वित्तीय मैनेजमेंट में भाजपा के काफी आगे होने के बाद भी यदि कमलनाथ के मुकाबले दमोह में मुख्यमंत्री का रोड शो कमजोर साबित हुआ है तो इसे भाजपा के लिए खतरे की घंटी कहा जा सकता है। हालांकि भाजपा विधायक और वित्त मंत्री जयंत मलैया केे मुकाबले के लिए कांग्रेस अभी तक अपना प्रत्याशी भी तय नहीं कर पाई है। जिससे इस बार भी उनको मात दे पाना बेहद मुश्किल भरा मिशन साबित होगा।

परंतु जिस तरह से देश में मोदी सरकार और प्रदेश में शिवराज सरकार की लोकप्रियता में गिरावट के सर्वे सामने आ रहे हैं। एससी-एसटी संशोधन एक्ट मामले में सरकार के रवैयेे से सवर्ण वर्ग नाराज हताश बना हुआ है। संगठन में उपेक्षा के कारण घर बैठ गए पुराने कार्यकर्ताओ की अनदेखी  आदि ऐसे विषय हैं जिन पर समय रहते भाजपा ने गौर नहीं किया तो शिवराज सरकार के लिए खतरे की घंटी बजना तय है। अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट

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