सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट संशो. पर मांगा जवाब-

नई दिल्ली।  केंद्र सरकार द्वारा एससी एसटी एक्ट संशोधन विधेयक पारित किए जाने के बाद स्कूल कर स्कूल कर इसको लेकर आशंकित वर्ग के लिए शुक्रवार को एक राहत भरी खबर सामने आई है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार  को नोटिस जारी करते हुए 6 सप्ताह में जवाब देने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत के मार्च के फैसले को निष्प्रभावी बनाने और SC/ST एक्ट (अत्याचारों की रोकथाम) कानून की पहले की स्थिति बहाल करने के लिए इसमें किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई शुरू करते हुए केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने इस कानून में किए गए संशोधन को निरस्त करने के लिए दायर याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया। केंद्र को छह सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देना है। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि संसद के दोनों सदनों ने ‘मनमाने तरीके’ से कानून में संशोधन करने और इसके पहले के प्रावधानों को बहाल करने का ऐसे निर्णय किया ताकि निर्दोष व्यक्ति अग्रिम जमानत के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सके।

संसद ने इस कानून के तहत गिरफ्तारी के खिलाफ चुनिन्दा सुरक्षा उपाय करने संबंधी शीर्ष अदालत के निर्णय को निष्प्रभावी बनाने के लिये नौ अगस्त को विधेयक को मंजूरी दी थी। विधेयक में SC/ST के खिलाफ अत्याचार के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत के किसी भी संभावना को खत्म कर दिया गया है। इसमें आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए किसी प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं है और इस कानून के तहत गिरफ्तारी के लिए किसी प्रकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में सपाक्स सहित अन्य संगठनों द्वारा याचिका दाखिल की गई थी।

 पूर्व में भी शीर्ष अदालत ने इस कानून का सरकारी कर्मचारियों के प्रति दुरुपयोग होने की घटनाओं का जिक्र करते हुए 20 मार्च को अपने फैसले में कहा था कि इस कानून के तहत दायर शिकायत पर तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। न्यायालय ने इस संबंध में अनेक निर्देश दिए थे और कहा था कि SC/ST कानून के तहत दर्ज ममलों में लोक सेवक को सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बाद ही गिरफ्तार किया जा सकता है।  

 एससी/ एसटी एक्ट में संशोधन मामले के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनबाई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी होने की खबर से उक्त संशोधन कानून से आशंकित वर्ग राहत की सांस लेता नजर आया है। साभार पंजाब केसरी व इंडिया न्यूज